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कल जेएनयू पर हुए नक्सली अटैक के आँखों देखा हाल बता रहे हैं, जेएनयू के रिसर्च फेलो Bhaskar Jyoti :-



BPSC में चयन के बाद से मैंने सोचा था कि अब राजनैतिक विषयों पर पोस्ट नहीं लिखूँगा, लेकिन कल JNU मेंं जो कुछ हुआ उससे अभी तक उबर नही पाया हूँ इसलिए लोगों के बीच कल के घटना की सच्चाई बताना अपना कर्तव्य समझता हूँ। कल रात 8 बजे मैं किसी तरह जंगलों के रास्ते कैम्पस से बाहर निकला अभी किसी मित्र के घर शरण लिया हूँ क्योंकि कैम्पस में यदि रात को रुकता तो पता नही हमारे साथ क्या होता, मेरे बेहद करीबी मित्र "ब" का माथा फोड़ दिया गया वह कावेरी छात्रावास से पेरियार छात्रावास यह देखने आ रहा था कि मैं सुरक्षित हूँ या नही और इसी दरम्यान उसे नक्सल गुंडों ने पीट पीट कर अधमरु कर दिया।
मैं तीन रात से ठीक से सो नहीं पाया था क्योंकि बैंग्लोर में कई सारे मित्रों से मिलना हुआ था, कल दिन मे 12 बजे के आसपास मैं बंगलोर से वापस पेरियार हॉस्टल पहुँचा, विंटर सेमेस्टर के रजिस्ट्रैसन का कल आखिरी दिन था, लेकिन नक्सलियों ने 2 दिन पहले ही पूरे कैम्पस का Wifi बंद कर दिया था, नका़बपोस गुंडों ने wifi के सारे केबल काट दिये थे ताकि किसी भी centre में रेजिस्ट्रेसन ना हो सके। तकरीबन 3 महीने से इन नक्सलियों ने JNU के सारे केंद्रों को जबरदस्ती बंद कर रखा था। जो छात्र रेजिस्ट्रेसन करवा रहे थे नक्सली उनकी लिस्ट तैयार कर रहे थे ताकि उनपर नक्सल कारवाई की जा सके। कल की घटना इसी नक्सल हमला के संदर्भ मे हुआ।
मित्र "क" और "ख" चार बजे दिन तक मेरे कमरे पर बैठ कर बातें कर रहे थे, मैंने बोला बहुत नींद आ रही है मैं कुछ देर सोता हूँ, फिर वे लोग चले गए, उनके गए हुए आधा घंटा भी नहीं हुआ था कि अचानक पेरियार हॉस्टल के नीचे काफी शोर होने लगा, मैं इतना थका हुआ था कि उठ के देखने का साहस नही हो रहा था कि क्या हुआ है, लेकिन 5 मिनट के अंदर ही ऐसा लगा कि हॉस्टल के शीशे टूट रहे हैं, मैं फटाफट उठ कर लॉबी में गया, देखा लगभग 200 नकाबपोश लोग हाथों में लोहे का रॉड तथा डंडे लिए पेरियार हॉस्टल के हरेक कमरे में घुसते चले जा रहे हैं, और डंडों से बेतरतीब प्रहार करके दरवाजे और खिड़कियों को तोड़ रहे हैं।
जैसे ही इन नकाबपोश नक्सलियों की नजर मेरे पर पड़ी उन्होंने मुझे गालियाँ दी और मेरे कमरे की ओर झपटे, किसी तरह मैं कमरे में घुसकर, दरवाजा के पीछे लकड़ी का अलमीरा, टेबल तथा कुर्सियां लगाकर दरवाजा को ब्लॉक किया, वे दरवाजा पर आकर इतनी तेज लाठियाँ बरसा रहे थे जैसे मॉब लिंचिंग करने आये हो। 3-4 मिनट ऐसा करने के बाद वो दूसरी तरफ गए और हॉस्टल से चीखने चिल्लाने की आवाज़ आती रही।
उनके जाने के बाद मैं अपने कमरे के बालकनी में गया, मेरा बालकनी हॉस्टल के मुख्य गेट की तरफ खुलता है, मैंने वहाँ देखा करीब 500 लोग नकाब पहने हाथों में डंडे लिए गोदावरी छात्रावास पर छात्रों को पीट रहे हैं, नकाबपोश लड़कियाँ पत्थरबाजी कर रही थी। यह बहुत ही सिहरा देने वाला दृश्य था, मैं यकीन नहीं कर पा रहा था कि यह क्या हो रहा है मेरे JNU में। लगभग आधे घंटे में सारे नक्सली पेरियार से यह कहते हुए निकल गए कि चलो अब माही मांडवी हॉस्टल चलकर पीटते हैं। मुझे लगा अब शांत हो गया।
उसके 20-25 मिनट के अंदर एकबार फिर से पेरियार हॉस्टल में 500 की संख्या में नकाबपोश नक्सली दौरे हुए आये, इसबार पेरियार हॉस्टल के गेट पर ही उन्होंने पेरियार के छात्रों को बेतहाशा पीटा, मैं बालकनी से आँखों से सब देख रहा था। मुझे वे नीचे से इशारा कर रहे थे कि रुको छोडूंगा नहीं, इसी बीच 50 लोगों की एक टुकड़ी फिर से हॉस्टल के अंदर दौरे, फिर से दरवाजे खिड़कियों को तोड़ने का क्रम शुरू, इसबार मैं काफी डर गया था, मैंने पुलिस को फोन किया कि हम बेहद खराब स्थिति में फसे हुए हैं, कृपया हमें बचाया जाए। मैंने अपनी आँखों से JNUSU अध्यक्ष आईशी घोष को पेरियार हॉस्टल के हमारे विंग में भाग कर आते देखा उस समय तक वो दुरुस्त थी मुझे नहीं पता फिर उसे चोट कब आई। करीब एक घंटे तक पेरियार के गेट पर पत्थरबाजी चलती रही।
लगभग एक घंटे के बाद मेरे मोबाइल पर एक शिक्षक "द" का बहुत सारा काल आया कि मेरा मित्र "ब" फोर्टिस अस्पताल के ट्रौमा सेंटर में है, मुझे हॉस्टल छोड़ कर निकल जाना चाहिए। हॉस्टल का कार्यकारी अध्यक्ष मेरे कमरे पर आया उसने बताया कि हॉस्टल मेस मे भी तोड़ फोड़ की गयी है आज खाना नहीं मिलेगा रात को और भी गहरा नक्सली एटेक होने की संभावना है, यदि निकल सकते हैं तो निकल जाइये। मैंने सपनों मे भी नहीं सोचा था कि ऐसे किसी दिन JNU छोड़कर जाना होगा जिस JNU पर हम सबसे सुरक्षित होने का अभिमान करते थे। मेरे लॉबी में अब तक सारे कमरों में ताला लग चुका था।
जैकेट में मुह ढककर मैं जंगलों के रास्ते 8:30 के करीब कैम्पस से बाहर निकल गया। बाहर आते ही मुझे मित्रों से पता चला कि मीडिया  में लोग बता रहे हैं कि ABVP वालों ने पिटाई की है, मेरे पास सफ़ाई में बोलने के लिए कुछ नहीं है। मैं कुशल हूँ, आप सबके काल और मेसेज आ रहे हैं, चिंता की कोई बात नहीं है। दुख की बात बस इतनी सी है कि JNU के अपने अंतिम दिनों में मैंने वामपंथ का चरमपंथी आतंकी स्वरूप अपने आँखों से देखा।

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