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ये कलयुग है जहाँ जैसा करियेगा आप वैसा ही आपके साथ होगा।

जिसे आपकी जरूरत हो आप उसके साथ सदैव रहे भले ही वो जब आपको उशकी सबसे ज्यादा जरूरत हो पर वो आपके साथ ना रहें।
 ये कलयुग है जहाँ जैसा करियेगा आप वैसा ही आपके साथ होगा।

यहाँ बच्चो को तो दूर उनके माता पिता को भी रामायण और भागवत जैसे ग्रंथ पढ़ने का किसी भी तरह का कोई इक्छा नही रहेता।
यहाँ पे हर व्यक्ति एकदूसरे को पछाड़ कर आगे बढ़ना चाहता है कोई नाम के लिए तो को दौलत सहोरात के लिये।बहुत कम लोग ही आज के दुनिया मै दूसरे के लिए जीते है और लोग उन्हें ऐसा समझते है कि उनके पास कुछ नही क्योंकि वो अपने लिए कुछ भी नही कर रहे पर मैं बता दु ऐसा नही है बल्कि इसका उल्टा है जो लोग दूसरों के लिए जीते है असल मायने मैं वही लोग असली जीवन का आनन्द उठा रहे है।



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