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लोहड़ी (पर्व)


* लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है
* यह मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है
* मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर इस त्यौहार का उल्लास रहता है
* रात्रि में खुले स्थान में परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर बैठते हैं
* रात्रि में बैठकर लोग रेवड़ी, मूंगफली, लावा आदि खाए जाते हैं
* लोहड़ी पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद (माघ  संक्रांति से पहली रात) यह पर्व मनाया जाता है
* यह प्राय: 12 या 13 जनवरी को पड़ता है
* लोहड़ी का त्यौहार पंजाबियों तथा हरयानी लोगो का प्रमुख त्यौहार माना जाता है
* लोहड़ी का त्यौहार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमांचल में धूम धाम तथा हर्षो लाश के साथ मनाया जाता हैं
* यह मुख्यत: पंजाब का पर्व है
* इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से 'त्योहार' (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है
* उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में 'खिचड़वार' और दक्षिण भारत के 'पोंगल' पर भी-जो 'लोहड़ी' के समीप ही मनाए जाते हैं
* लोहड़ी से 20-25 दिन पहले ही बालक एवं बालिकाएँ 'लोहड़ी' के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं
* संचित सामग्री से चौराहे या मुहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है
* रात्रि में मोहल्ले और गांव के लोग अग्नि के चारों और बैठ जाते हैं और नृत्य के साथ साथ रेवड़ी मूंगफली आदि चीजें खाते हैं
* घर लौटते समय 'लोहड़ी' में से दो चार दहकते कोयले, प्रसाद के रूप में, घर पर लाने की प्रथा भी है
* जिन परिवारों में लड़के का विवाह होता है अथवा जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मुहल्ले या गाँव भर में बच्चे ही बराबर बराबर रेवड़ी बाँटते हैं
* शहरों के शरारती लड़के दूसरे मुहल्लों में जाकर 'लोहड़ी' से जलती हुई लकड़ी उठाकर अपने मुहल्ले की लोहड़ी में डाल देते हैं यह 'लोहड़ी व्याहना' कहलाता है
* लोहड़ी त्यौहार के उत्पत्ति के बारे में काफी मान्यताएं हैं जो की पंजाब के त्यौहार से जुडी हुई मानी जाती हैं
* कई लोगो का मानना हैं कि यह त्यौहार जाड़े की ऋतू के आने का द्योतक के रूप में मनाया जाता हैं
* लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता हैं लोहड़ी की सभी गानों को दुल्ला भट्टी से ही जुड़ा तथा यह भी कह सकते हैं कि लोहड़ी के गानों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता हैं
* दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था
* दुल्ला भट्टी एक विद्रोही था और जिसकी वंशवली भट्टी राजपूत थे उसके पूर्वज पिंडी भट्टियों के शासक थे जो की संदल बार में था अब संदल बार पकिस्तान में स्थित हैं

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