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देश में वामपंथियों से बड़ा सूतिया कोई नहीं होगा और बदकिस्मती देखिए ये सूतियन समूह दूसरे को सूतिया समझता है।



ताजा दो उदाहरण से समझिए :
#शाहिन_बाग में वामपंथियों ने 500 रूपये की दिहाड़ी पर अपने पूंजीवादी सहयोगियों के मदद से 400-500 बूर्कानशीं महिलाओं को इकठ्ठा कर एक प्रायोजित आंदोलन चलाया।  लेकिन इसे इस तरह से प्रोजेक्ट किया की देश की सारी महिला की भागीदारी शाहिन बाग के आंदोलन में हो और देश के सारी महिलाएं #सीएए के विरोध में हो।

इसी तरह के विरोध का दिखावा वामपंथियों ने  मुसलमान और वामपंथी प्रभुत्व वाले विश्वविद्यालय में #सीएए का विरोध कर यह दिखाने का प्रयास किया की देश के युवा और छात्र सीएए के खिलाफ हो।

वामपंथियों के इस नकली और झूठे आंदोलन की हवा निकालते हुए अमित शाह ने लखनऊ के एक विशाल जनसभा में कहा, " चाहो जितना विरोध कर लो, #सीएए वापस नहीं होगा"। क्योंंकि अमित शाह को मालूम है, "ये बूर्के में कैद खातून और पाश्विक विचारधारा से लैश छात्र देश के आम मानस नहींं है और ना हो सकता है"। 

वामपंथियों को कब  ये समझ आएगा, "ये देश कभी भी नक्सल और जेहाद के कॉकटेल को स्वीकार नहीं कर सकता। लेकिन चरस में मस्त और अपने अहंकार को हीं अंतिम सत्य मानने वाले वामपंथियों को कौन समझाए।

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