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हाँ मैं बेटी हु😅

कब दोगे भारत देश को अपने बुरे सोच से आज़ादी?
बेटिया ही क्यों सहै सारि मजबूरिया?
बेटे को क्यों नही पढ़ाते संस्कार का पाठ?



हाँ मैं बेटी हु😅
मत पहुचे मेरे सपने मुझसे,
मेरी उम्मीदे भी पापा पे ही टिकी है😅
पर मैं पापा का बेटा नही मेरे सपने पापा के लिये कुछ नही,
क्योंकि मैं बेटी हु। 

मैं इंसान नही हु क्या?
मेरे साथ ऐसा वर्ताव क्यों😅
मुझे क्यों हक़ नही अपने मन का काम करने का?
देश मैं बस नारे ही लगेंगे क्या न्याय का क्या?

सब मुझे ही क्यों कहेंगे 😅
बेटा रात को घर के बहार मत निकलो।
बेटा ये मत पहेनो छोटा हैं।
बेटा घर की इज़्ज़त के बारे मे सोचना।
बेटा ..................................

हाँ मैं बेटी हु😅
मूझे हक़ नही कुछ करने का,
मुझे हक़ नही कुछ बोलने का,
मुझे हक़ नही कुछ अपने मन का करने का,
मुझे हक़ नहीं जीने का😓
मैं मासूम बनु तो हैवानियत की शिकार ,
मैं अपना बच्चाव करु तो मेरे  अंदर संस्कार की कमी,
मैं कुछ बोलू तू बिगरी हु,
मैं सान्त रहू तो मुझे कुछ भी नही आता।


हाँ मैं बेटी हु पर मैं भी इंसान ही हु।

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