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हीनभावना (Inferiority complex)

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* अपनी योग्यता को कम समझने, अनिश्चित होने या मानक स्तर से कम होने की भावना हीनभावना या हीनता मनोग्रंथि कहलाती है
* यह भावना प्रायः अवचेतन मन में बैठी रहती है
* एडलर के अनुसार, प्रौढ़ व्यक्तियों में विकसित हीनता की वह भावना जिसका कारण यह होता है कि वे अपने बचपन की अवधि में उत्पन्न हीनता की भावना पर नियंत्रण नहीं पा सके हैं
* इस मनोरोग से ग्रस्त लोग दूसरों द्वारा स्वीकार न किए जाने के डर से किसी भी नए व्यक्ति से मिलने या उससे बात करने में कतराते हैं
* ऐसे लोग अपनी आलोचना व तिरस्कार के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं
* प्रतिभा और योग्यता होने के बावजूद ये लोग जीवन में सामाजिक और व्यवसायिक क्षेत्र में प्रायः विफल रहते हैं
* इसके पीछे कुछ हद तक अनुवांशिक कारण भी उत्तरदाई होते हैं
* बच्चे के माता-पिता उसके हर काम में कमी निकालते हैं और उसकी तुलना दूसरों से करते हैं तो बच्चे में हीनभावना घर कर जाती है
* माता-पिता में परस्पर झगड़ा होना व पिता में नशे की लत का होना भी बच्चों में आत्मविश्वास की कमी का कारण होता है
* आत्मविश्वास में कमी हीनभावना का मुख्य लक्षण है
* आत्मविश्वास की कमी के चलते ऐसे लोग हमेशा अपने हुनर गुण व उपलब्धियों को अनदेखा कर देते हैं या उन्हें पहचानने से इंकार कर देते हैं
* ऐसे व्यक्ति निर्णय लेने में असमर्थ हो जाते हैं और किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले ही उन्हे असफलता या किसी दुर्घटना के होने की चिंता सताने लगती है
* ऐसे व्यक्ति मन ही मन अपने को दूसरों से कमतर समझते है
* ये लोग अन्य लोगों से मिलने या पूर्ण रूप से खुलकर बातचीत करने में संकोच महसूस करते है
* दूसरों से बात करते समय ऐसे लोग हमेशा दुविधा में रहते हैं
* दूसरों द्वारा की गई सकारात्मक टिप्पणियों को भी यह लोग अपने खिलाफ समझते हैं
* ऐसे लोग अपने रंग रूप बोलचाल कद काठी तथा कपड़ों से हमेशा असंतुष्ट रहते है
* व्यक्तित्व के इस प्रकार के विकार के इलाज में मनोचिकित्सा का प्रमुख स्थान है
* स्वजनों की सहायता से व्यक्ति को उसकी संवेदनशीलता को पहचानना व उससे निपटने की विधियां सिखाई जाती है
* माता-पिता को बच्चे की कमियों को अनदेखा कर सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए ट्रेनिंग दी जाती है घर में ऐसा बच्चा होने पर माता-पिता को आपसी मतभेद को उसकी अनुपस्थिति में ही सुलझाना चाहिए
* अपनी कमियों अथवा बुराइयों के बारे में अत्यधिक नहीं सोचना चाहिए
* अपने कमरे में अपनी कोई ऐसी तस्वीर लगाएं जो आपको बहुत पसंद हो
* अपनी खूबियों को पहचान कर उसमें प्रवीणता हासिल करने की कोशिश करें
* लोगों से दोस्ती बढ़ाएं और सकारात्मक बातें करें
* हमेशा दूसरों की कमियां निकालने वाले लोगों से दूर रहें
* स्वयं का सम्मान करना सीखें जब स्वयं आप अपना सम्मान करेंगे तभी लोग भी आपका सम्मान करेंगे

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