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ऐसा होगया क्या होगया जो जामिया के विद्यार्थियों ने भी समर्थन दे दिया JNU के छात्रों को।

क्या होरहा है देश मैं विद्यार्थियों से अब हम ये उमीद करे कि वो गुंडागर्दी करेंगे।
पढ़ाई के नाम पे कॉलेजो मैं मारपीट करेंगे और जब नौकरी नही मिलेगी तब बेरोजगारी का रटा लगाएंगे।

आज जो JNU मैं हुआ वो बहुत जी शर्मसार हैं। बच्चे के माता पिता सोचते है कि उनके बच्चे स्कूल और कॉलेजों मैं सुरक्षित रहेंगे पर कुछ गुंडो के करण पूरा माहौल खराब होजाता हैं।

जो लोग सर्वर रूम मैं थे और रेजिस्ट्रेशन रोक रहे थे उनको इससे क्या फायदा ओर उनमे इतनी हिम्मत कहा से आई?
JNU मैं ऐसा माहौल अभी ही क्यों बन रहा ?

जामिया के छात्र छात्रों ने भी समर्थन दिया है JNU के विद्यार्थियों को। जब देश की बेटियों के साथ अन्याय होता है तब कहा चल जाती है इन सबकी समर्थन देने वाली आदत?
इलेक्शन समय ही क्यों सबको गुंडागर्दी करनी है।


जो लोग घायल हुए है उनके लिए अफसोस करना क्या सही है?

बिना जाने किसी पे भी आरोप लगाना किस हद तक सही है?

ABVP  ने जारी किया अपना नोटिस जिस मैं उसने कुछ बातों को स्पष्ट किया है 👇👇


Twitter pe v aane lga hai JNU हिंसा के बारे मे सैलाब





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