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चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse)


* चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है
* चंद्रग्रहण तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हों
* पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है तो चंद्रमा पृथ्वी की छाया में छिप जाता है और दिखाई नहीं देता ऐसे में जब हम चंद्रमा को देखने की कोशिश करते हैं तो वह दिखाई नहीं देता या फिर काला दिखाई देता है इसी स्थिति को ज्योतिष में च्रद्रग्रहण कहा गया है
* ज्यामितीय प्रतिबंध के कारण चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है
* चंद्रग्रहण का प्रकार एवं अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता हैं
* किसी सूर्यग्रहण के विपरीत, जो कि पृथ्वी के एक अपेक्षाकृत छोटे भाग से ही दिख पाता है, चंद्रग्रहण को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है
* जहाँ चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है
* चंद्रग्रहण को, सूर्यग्रहण के विपरीत, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्रग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम होती है
* सूर्य का प्रकाश सात रंगों का होता है किरणों का नीला रंग वायुमंडल द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है जिससे आसमान नीला दिखाई देता है जबिक किरणों का लाल रंग वायुमंडल में नहीं फैल पाता। सूर्य का प्रकाश पृथ्वी से टकराता है और परावर्तित होकर चंद्रमा पर पड़ता है इस परावर्तन कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण चंद्रमा में हल्के लाल रंग का प्रकाश पड़ता है जिससे चंद्रमा हल्के लाल रंग का दिखाई देता है वैज्ञानिक इसी हो ब्लड मून कहते हैं
* हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण का बहुत महत्व है शास्त्रों में भी ग्रहण से जुड़ी कई बातें कही गई हैं
* भारत में ग्रहण को लेकर कई अंधविश्वास भी हैं, जबकि विज्ञान ग्रहण को लेकर किसी भी अंधविश्वास को नहीं मानता विज्ञान के मुताबिक ग्रहण पूरी तरह खगौलीय घटना है
* चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात को ही होता है
* चंद्र ग्रहण दो प्रकार के होते हैं जिन्हें पूर्ण चंद्र ग्रहण और आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं
* जब पृथ्वी की छाया समस्त सम्मुख भाग पर पड़ती है और चंद्रमा का सम्पूर्ण भाग अंधकारमय हो जाता है, पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है
* जब चंद्रमा का कुछ ही भाग छाया में होता है, उसका उतना अंधकारमय भाग चाप के आकार में कटा हुआ दिखाई पड़ता है। इसे खंड चंद्र ग्रहण या आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं

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