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भारत का सबसे सुंदर जगह अराणमुला (Aranmula) एक बार अवश्य पधारे।

अराणमुला (Aranmula)
* केरल की राजधानी तिरुवंतपुरम से करीब 110 किमी की दूरी पर स्थित पथनमथिट्टा जिले का अराणमुला इतिहास संस्कृति और देश की साझा विरासत का खूबसूरत नमूना है
* शिल्प को समर्पित यह स्थान एशिया में आयोजित होने वाली सबसे बड़ी क्रिश्चियन असेंबली के लिए प्रसिद्ध है
* पवित्र पंबा नदी के किनारे बसा यह स्थल ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विख्यात है
* यूं तो अराणमुला की पहचान बहुत सी चीजों से है लेकिन यहां की सबसे प्रमुख पहचान है अराणमुला कन्नाड़ी यानी हिंदी व उर्दू में दर्पण या आईना और मलयालम तमिल में कन्नाडी
* यहां का दर्पण इस जगह को विश्व में खास पहचान देता है इसकी वैश्विक पहचान को हम ऐसे भी जान सकते हैं कि यह देश के उन खास उत्पादों और जगहों में से है जिसे जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिला हुआ है इसका अर्थ हुआ कि अराणमुला कन्नाडी पर किसी और स्थल के लोगों का दावा नहीं हो सकता
* सबसे खास बात यह है कि कन्नालडी शीशे की बजाय धातु से बनाए जाते हैं और उन्हें बनाने की प्रक्रिया पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है
* इस दर्पण की विशेषता का एक कारण यह भी है कि जहां शीशे के दर्पण में प्रतिबिंब उसकी भीतरी सतह पर किए गए पारे के लेप के कारण बनते हैं तो वही इसमें छवि मुख्य सतह पर ही बनती है
* हड़प्पा की खुदाई में 5 इंच व्यास के तांबे के दर्पण के साक्ष्य मिले है
* धातु के दर्पण के प्रमाण ऋग्वेद की ऋचाओं में भी मिलते हैं
* खजुराहो की मूर्तियों में भी एक स्त्री को अराणमुला कन्नाडी की तरह एक दर्पण से श्रृंगार करते हुए देखा जा सकता है
* माना जाता है कि अराणमुला आईना बनाने वालों के पूर्वज सप्त सैंधव प्रदेश से दक्षिण भारत की ओर आए होंगे
* इन दर्पणों को बनाने वालों के पूर्वज मंदिर और वास्तुकला के विशेषज्ञ थे
* द्रविड़ शैली के जिन मंदिरों और उन पर अंकित नक्काशीयों को देखकर हम दांतो तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाते हैं यह सब उन्हीं शिल्पियों की देन है
* त्रावणकोर के राजा ने इस समुदाय को केरल में द्रविड़ शैली के मंदिर बनवाने के लिए आमंत्रित किया इनमें से तिरुवंतपुरम का पद्मनाभस्वामी मंदिर अराणमुला का पार्थसारथी मंदिर चैंगनूर का महादेव मंदिर और हरिपाद का श्रीमुरुगा मंदिर आज भी पूरी शान के साथ खड़ा है
* अराणमुला से तकरीबन 5 किलोमीटर की दूरी पर एक जगह है मरामॉन। यह स्थान ईसाई संस्कृति के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है यहां एशिया की सबसे बड़ी इसाई महासभा होती है साल में एक बार आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम फरवरी माह में होता है
* कोनी अपने प्राकृतिक वैभव के लिए प्रसिद्ध है जो अराणमुला से तकरीबन 25 किमी की दूरी पर है यहां के जंगल पहाड़ और जंगली जीव जंतु आपका मन मोहने के लिए काफी हैं
* वैसे केरल में अनेक स्थानों पर अनूठी नौका दौड़ होता है लेकिन अराणमुला की नौका दौड़ को राज्य की सबसे पुरानी नावों की प्रतियोगिता होने का गौरव प्राप्त है
* अराणमुला की ऐतिहासिक विरासत का आधार स्तंभ है यहां का पार्थसारथी मंदिर। केरल की पारंपरिक शैली में निर्मित यह मंदिर भव्य और बेहद स्वच्छ है भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर पंबा नदी के तट पर बना है
* अराणमुला पथनमथिट्टा जिले का हिस्सा है जो सबरीमाला मंदिर के लिए प्रसिद्ध है जो यहां से 45 किमी की दूरी पर है
* यहां आने वाले पर्यटक धातु के दर्पण या कन्नाडी आईनों को अपने सामने बनते हुए देख सकते हैं आप चाहे तो इसे उपहार स्वरूप ले भी जा सकते हैं
* अराणमुला से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अरुविकुज्ही झरना अपने शक्तिशाली धाराओं और अछूते सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है
* खानपान के मामले में यह स्थान केरल के अन्य स्थानों की तरह ही है जहां सभी स्थानीय व्यंजन मिलते हैं धार्मिक पहचान से जुड़ा होने के कारण शाकाहारी भोजन पर जोर रहता है
* ओणम के अवसर पर मिलने वाली पार्थसारथी मंदिर की सद्या यानी भोज का स्वाद लेना यहां की यात्रा की चरम उपलब्धि होती है इसमें मिलने वाले 60 प्रकार के व्यंजनों का स्वाद ताउम्र याद रहने वाला बन जाता है
* यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन चैंगनूर है और हवाई अड्डा तिरुवंतपुरम है
* यहां टैक्सी और बस की सुविधा आसानी से उपलब्ध है
* यहां मानसून के समय आएं या बाद में, मौसम सही रहता है।



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