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रामेश्वर के पास कहाँ घुमे ?तिरुवंतपुरम (Thiruvananthapuram)

तिरुवंतपुरम (Thiruvananthapuram)

* केरल राज्य परशुराम के फरसे के आकार का है इसकी राजधानी के रूप में तिरुवंतपुरम खास बहुरंगी सौंदर्य के लिए विख्यात है
* आप सोचेंगे कि यहां बहुरंग सौंदर्य किस बात की ओर संकेत करता है दरअसल इस शहर में प्राकृतिक सौंदर्य के विभिन्न रूप एक दूसरे से एकाकार होते हुए रोमांच प्रदान करते हैं
* यहां एक और पर्वतीय सुंदरता खिलती है तो दूसरी ओर गंभीर गर्जना से अपनी विराटता का बोध कराते समुंदर हैं
* यहां कोई समुद्र तट अपने आसपास के चट्टानों के लिए प्रसिद्ध है तो कोई कोने में खड़े लाइट हाउस के लिए कहीं का सूर्योदय चित्ताकर्षक है तो कहीं का सूर्यास्त
* देशभर में स्थानीय निकायों को आज जितने अधिकार प्राप्त हैं उन सब के मूल रूप आजादी के तुरंत बाद से तिरुवंतपुरम की गलियों में दिखने लगे थे
* किसी भी राज्य की राजधानी हो जाना शहर के गौरव को बढ़ा देता है इसके साथ ही उस शहर के साथ एक भव्य राजनीति आभामंडल भी जुड़ जाता है लेकिन तिरुवंतपुरम इस तरह के किसी आडंबर से दूर रहने वाला शहर है
* यहां के जनजीवन से लेकर शहर की आम गतिविधि तक में इसकी सहजता हावी रहती है यह शहर पैदल चलने वालों को खूब भाता है
* यहां की सड़कों पर अनावश्यक भीड़भाड़ नहीं दिखती वाहनों की आपाधापी से दूर यहां की सड़कें चलने वालों को अद्भुत सुकून का एहसास कराती हैं
* चूंकि यह शहर बहुत बड़ा नहीं है इसलिए एक छोर से दूसरे छोर तक जाना बहुत आसान होता है फिर सड़कों की साफ-सफाई और उनके किनारे खड़े वृक्षों का सौंदर्य पैदल चलने वालों को बरबस ही अपनी ओर खींचता है
* शहर की सुरक्षित सड़के रात में बहुत आकर्षक हो उठती हैं जब वाहनों का आना-जाना लगभग बंद हो जाता है
* 10 वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों तक यहां अयों का राज रहा वह क्षेत्र की प्रमुख ताकत थे पर वेनाड शासकों के अभ्युदय के बाद उनका पराभव हो गया
* 17 वीं शताब्दी में उमायम्मा रानी के शासनकाल में अंग्रेजों को फैक्ट्री बनाने और उसे सुरक्षित व मजबूत करने के लिए समुंद्र के किनारे जमीन मिली
* यहां के अंजेंगों नामक स्थान से अंग्रेजों ने शहर के अन्य भागों सहित त्रावणकोर के बड़े हिस्से तक अपनी ताकत का विस्तार कर लिया
* यहां का आधुनिक इतिहास मार्तंड वर्मा के शासनकाल का माना जाता है जिन्हें आधुनिक त्रावणकोर का पिता कहा जाता है
* उन दिनों तिरुवंतपुरम बौद्धिक और कलात्मक गतिविधियों का महान केंद्र  माना जाता था तथा कार्यशालाएं होती थी
* त्रावणकोर के संस्थापक मार्तंड वर्मा ने 1745 में तिरुवंतपुरम को अपनी राजधानी बनाया था
* केरल अपने श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के लिए विख्यात है यह मंदिर वैष्णव धर्मावलंबियों का पवित्र स्थान माना जाता है
* श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के उन कुछ मंदिरों में से एक है जिनमें केवल हिंदुओं का प्रवेश होता है यह भगवान विष्णु को समर्पित है
* शहर के बीचोबीच नेपियर म्यूजियम स्थित है यह संग्रहालय डेढ़ सौ साल पुराने भवन में स्थित हैं यह़ा मूर्तियां पेंटिंग और वाद्य यंत्रों का अपार खजानों का दर्शन किया जा सकता है
* ब्रिटिश काल में अंग्रेज तिरुवंतपुरम को ट्रिवांड्रम कहते थे जो हिंदी में त्रिवेंद्रम कहा जाने लगा
* तिरुवंतपुरम को तीन भागों में बांट कर इस शब्द का अर्थ करें तो तिरु का अर्थ श्री, वनंत का अर्थ अनंत शब्द श्री विष्णु के लिए और पुरम स्थान के लिए प्रयुक्त होता है अर्थात तिरुवंतपुरम का अर्थ है भगवान श्री विष्णु का नगर
* यहां महाराजा स्वाति तिरुनल ने कर्नाटक संगीत के विकास में मुख्य भूमिका निभाई वे स्वयं कर्नाटक संगीत के गुणी आचार्य थे
* यह स्थान कई साहित्यकारों का जन्म और कार्यस्थल रहा है जिनमें ए आर राजाराम वर्मा भी हैं इसके अलावा महाकवि कुमारन आशान महाकवि उल्लूर आदि प्रमुख हैं
* यहां कोवलम साहित्य उत्सव के नाम से हर साल वार्षिक साहित्य उत्सव भी होता है
* पेंटिंग की दुनिया में राजा रवि वर्मा का नाम विश्व विख्यात रहा है वे तिरुवंतपुरम से कुछ ही दूर स्थित गांव किलीमन्नूर के मूल निवासी थे
* तिरुवंतपुरम से 15 किमी की दूरी पर स्थित कोवलम बीच, इसके एक ओर है अरब सागर और दूसरी ओर है विशाल चट्टाने यह बीच दो तटों में बटा हुआ है पहले तट का नाम है ईव तट और दूसरे का लाइटहाउस तट
* तिरुवंतपुरम में बैकवॉटर्स का एक बड़ा हिस्सा है जहां जाकर आपको प्रकृति के अछूते सौंदर्य का आनंद मिलेगा
* शहर से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पूवर द्वीप यह द्वीप बैक वाटर्स से तो घिरा ही है साथ ही अरब सागर का भी एक हिस्सा इसमें खुलता है
* शहर के करीब होने के कारण संगमुखम स्थानीय निवासियों में बहुत प्रसिद्ध है यहां की सुबह बहुत सुंदर होती है जिसका लुत्फ लेने के लिए लोग सूरज उगने से काफी पहले से ही तट पर आने लगते हैं
* यहां केरल के प्रसिद्ध शिल्पकार कानाइ कुंजीरामन की बनाई सागरकन्या की विशाल मूर्ति अपने आप में अलग ही आकर्षक का केंद्र है



केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित ...



File:Thiruvananthapuram montage 2020.jpg - Wikimedia Commons






* पोनमुडी तिरुवंतपुरम का एक हिल स्टेशन है जो शहर से 50 किलोमीटर दूर है समुद्र से लगभग 950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल ट्रेकिंग करने वालों को बहुत पसंद आता है
* अगस्त्यकूटम केरल की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है सैकड़ों विशिष्ट पक्षियों का निवास स्थल होने की वजह से यह पक्षी प्रेमियों का स्वर्ग माना जाता है
* नेयार बांध और वन्य जीव अभ्यारण्य शहर से 6 किमी की दूरी पर स्थित है यह लॉयन और डियर सफारी के लिए प्रसिद्ध है यहां एक घड़ियाल फार्म व हाथियों के पुनर्वास का केंद्र भी हैं
* यहां कई बाजार हैं जो पर्यटकों को स्थानीय व देशी विदेशी सामान उपलब्ध करवाते हैं यहां बनने वाले सोने के आभूषण काफी लोकप्रिय हैं
* पर्यटक यहां से केरला सेट साड़ी कसवु साड़ी और सेट मूंड भी खरीद कर ले जाते हैं
* मानसून में या फिर सर्दी के समय इस मनोरम शहर की यात्रा जा सकते हैं यह भारत के सभी स्थलों से रेल सड़क और हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है
* यहां का नजदीकी हवाई अड्डा शहर से 6 किमी दूर है यह एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो देश दुनिया के बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है
* तिरुवंतपुरम सेंट्रल रेलवे देश के विभिन्न शहरों से जुड़ा है रेल द्वारा भी आसानी से यहां आया जा सकता है
* यहां आकर बस से भी स्थानीय जगह घूम सकते हैं

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